सुरभि न्यूज़
प्रताप अरनोट, शिमला
हिमाचल प्रदेश में उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों और दायित्वों के प्रति जागरूक करने के लिए हिमाचल उपभोक्ता संरक्षण परिषद ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम एवं उपभोक्ता जागरूकता को स्कूली पाठ्यक्रम में नियमित विषय के रूप में शामिल करने की मांग उठाई है।
परिषद के अध्यक्ष जोगेन्द्र कंवर और उपाध्यक्ष रणजीत सिंह धीमान ने संयुक्त बयान में कहा कि स्कूली शिक्षा में उपभोक्ता अधिकारों एवं दायित्वों को शामिल करने की मांग परिषद लंबे समय से सरकार के समक्ष उठाती रही है, लेकिन अभी तक इस दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाया गया है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में डिजिटल लेनदेन, ऑनलाइन खरीदारी और विभिन्न प्रकार की डिजिटल सेवाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। ऐसे में उपभोक्ताओं को ठगी, भ्रामक विज्ञापनों, मिलावटखोरी और असंतोषजनक सेवाओं से बचाने के लिए जागरूकता बेहद जरूरी है। विशेषकर प्रदेश के दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी का फायदा उठाकर उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी के मामले सामने आते रहते हैं।
परिषद पदाधिकारियों के अनुसार यदि बच्चों को स्कूली स्तर से ही उपभोक्ता अधिकारों की जानकारी दी जाए तो वे न केवल स्वयं जागरूक होंगे, बल्कि अपने परिवार और समाज को भी जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इससे आने वाली पीढ़ी अपने अधिकारों के साथ-साथ उपभोक्ता के रूप में अपने दायित्वों को भी बेहतर ढंग से समझ सकेगी।
उन्होंने कहा कि बदलते तकनीकी दौर में साइबर एवं डिजिटल धोखाधड़ी से बचाव, ऑनलाइन खरीदारी में सावधानियां, बिल एवं रसीद लेने का महत्व, उत्पादों की गुणवत्ता, भ्रामक विज्ञापनों की पहचान तथा शिकायत निवारण की प्रक्रिया जैसी जानकारियां विद्यार्थियों को दी जानी चाहिए।
हिमाचल उपभोक्ता संरक्षण परिषद ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मांग की है कि परिषद की इस मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए स्कूली पाठ्यक्रम में उपभोक्ता जागरूकता को शामिल करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएं।
परिषद ने बताया कि इस संबंध में जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल सरकार के समक्ष अपना पक्ष रखेगा और उपभोक्ता जागरूकता विषय को स्कूली शिक्षा में शामिल किए जाने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा करेगा।











