राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने लोक गायक इन्द्र जीत का नया हिमाचली गीत ‘रिज़ा री माणु’ का किया विमोचन 

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सुरभि न्यूज़

प्रताप अरनोट, शिमला : 04 अक्टूबर

हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध लोक गायक इन्द्र जीत का नया हिमाचली लोकगीत ‘रिज़ा री माणु’ YouTube पर रिलीज हो गया है। गीत का विमोचन हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने राजभवन शिमला में किया।

इस अवसर पर राज्यपाल ने लोक गायक इन्द्र जीत द्वारा हिमाचली संस्कृति और लोक परंपराओं को संरक्षित करने तथा उन्हें देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने नए गीत के लिए इन्द्र जीत को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि लोक संस्कृति को जीवंत बनाए रखने में कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

‘रिज़ा री माणु’ गीत को इन्द्र जीत ने स्वयं लिखा और कंपोज किया है। गीत में हिमाचल की पारंपरिक संगीत विरासत को प्रमुखता देते हुए ढोल, नगाड़ा, शहनाई और करनाल जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों का इस्तेमाल किया गया है।

गीत का फिल्मांकन भी हिमाचल की पारंपरिक संस्कृति को ध्यान में रखकर किया गया है। पारंपरिक वेशभूषा और काठकुनी शैली के मकानों वाले हिमाचली गांव की पृष्ठभूमि गीत को खास पहचान देती है। वीडियो में हिमाचल के ग्रामीण जीवन, लोक परंपराओं और पहाड़ी संस्कृति की खूबसूरत झलक देखने को मिलती है।

लोक गायक इन्द्र जीत लंबे समय से अपने गीतों और संगीत के माध्यम से हिमाचल की समृद्ध लोक संस्कृति को देश-दुनिया तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। उनके गीतों में हिमाचली परंपराओं, पारंपरिक वेशभूषा, लोक संगीत और पहाड़ी जीवनशैली को प्रमुखता मिलती है।

इन्द्र जीत का मानना है कि आधुनिक दौर में अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत को बचाए रखना बेहद जरूरी है। उनका प्रयास है कि हिमाचल की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत नई पीढ़ी तक पहुंचे और युवा अपनी लोक परंपराओं से जुड़े रहें।

गीत को लेकर लोक गायक इन्द्र जीत ने कहा, “हम रहें या न रहें, लेकिन हमारी संस्कृति जिंदा रहनी चाहिए। मैंने हमेशा हिमाचल की प्राचीन एवं समृद्ध संस्कृति को प्रमोट करने का प्रयास किया है और आगे भी यह प्रयास जारी रहेगा। मुझे पूरी उम्मीद है कि ‘रिज़ा री माणु’ गीत लोगों को पसंद आएगा और हमेशा की तरह दर्शको का प्यार और आशीर्वाद मिलेगा।”

नए गीत के रिलीज होने के बाद हिमाचली संगीत प्रेमियों में इसे लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है। पारंपरिक वाद्ययंत्रों, वेशभूषा और हिमाचली ग्रामीण परिवेश के साथ तैयार किया गया यह गीत लोक संस्कृति के संरक्षण की दिशा में इन्द्र जीत के प्रयासों को आगे बढ़ाता है।

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