सुरभि न्यूज़
प्रताप अरनोट, लाहौल-स्पीति :+07 अक्तूबर
चाइल्ड हेल्पलाइन यूनिट, लाहौल एवं स्पीति की ओर से राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जहालमा में बाल अधिकारों को लेकर एक दिवसीय जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर में विद्यालय के छात्र-छात्राओं के साथ आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं तथा महिला मंडल सदस्यों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला बाल संरक्षण अधिकारी डॉ. हीरा नंद ने की।
शिविर में किशोरों को नशे से दूर रहने, लैंगिक समानता, बाल संरक्षण, साइबर अपराध, दत्तक ग्रहण और चाइल्ड हेल्पलाइन सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने जानकारी दी।
PHC जहालमा की चिकित्सा अधिकारी डॉ. अंकिता ने ड्रग एडिक्शन पर जानकारी देते हुए कहा कि किशोरावस्था में नशे की लत बच्चों के भविष्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। उन्होंने नशे के दुष्प्रभाव, इसकी पहचान के लक्षण और बचाव के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तनाव, दोस्तों का दबाव और जिज्ञासा बच्चों को नशे की ओर ले जा सकते हैं। ऐसे में परिवार और शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि PHC जहालमा में नशा मुक्ति संबंधी परामर्श सुविधा भी उपलब्ध है।
संरक्षण अधिकारी (संस्थागत) जोगिंदर कुमार ने जेंडर सेंसिटिविटी पर बच्चों को जागरूक करते हुए कहा कि लड़के और लड़कियों के बीच किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। बेटियों को भी बेटों के समान शिक्षा, पोषण और अवसर मिलना उनका अधिकार है। उन्होंने लैंगिक समानता के साथ POCSO अधिनियम, बाल सुरक्षा तथा बाल विवाह के दुष्परिणामों की जानकारी दी।
जिला बाल संरक्षण अधिकारी डॉ. हीरा नंद ने बाल अधिकारों पर मुख्य वक्तव्य देते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चे को जीने, विकास, संरक्षण और सहभागिता का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए निशुल्क शिक्षा के कानूनी अधिकार की जानकारी दी। इसके अलावा उन्होंने स्पॉन्सरशिप योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना और बाल सेवा योजना के बारे में भी बताया।
चाइल्ड हेल्पलाइन यूनिट की काउंसलर शशि दीवान ने चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की कार्यप्रणाली समझाई। उन्होंने बताया कि कोई भी बच्चा अथवा आम नागरिक बाल श्रम, बाल विवाह, बच्चों से मारपीट या गुमशुदा बच्चों से संबंधित सूचना 1098 पर दे सकता है। उन्होंने बताया कि हेल्पलाइन 24 घंटे निशुल्क सेवा प्रदान करती है। इस दौरान बच्चों को गुड टच और बैड टच के बारे में भी जागरूक किया गया।
स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी (SAA) की कोऑर्डिनेटर कविता ढीसा ने दत्तक ग्रहण की कानूनी प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अनाथ, परित्यक्त और अभ्यर्पित बच्चों को कानूनी रूप से गोद लेने की प्रक्रिया CARA के माध्यम से पूरी की जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गैर-कानूनी तरीके से बच्चे को गोद लेना या देना अपराध है।
पुलिस थाना जहालमा के ASI गिरधारी लाल ने स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट (SJPU) के तहत बच्चों को उनके अधिकारों और पुलिस की भूमिका की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बच्चों से जुड़े मामलों में पुलिस का उद्देश्य उन्हें दंडित करना नहीं, बल्कि उनका संरक्षण और सुधार सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक थाने में बाल कल्याण पुलिस अधिकारी नियुक्त होता है, जो बच्चों से संबंधित मामलों में मित्रवत तरीके से कार्य करता है। उन्होंने बच्चों को साइबर अपराधों से बचने के लिए आवश्यक सावधानियां भी बताईं।
डॉ. हीरा नंद ने बताया कि जिले के सभी स्कूलों को बाल अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए विस्तृत कार्यक्रम तैयार किया गया है। इसके तहत अक्तूबर-नवंबर 2026 के दौरान लाहौल ब्लॉक के सभी 45 सरकारी और निजी स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा अपने अधिकारों और सुरक्षा संबंधी जानकारी से वंचित न रहे।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों को बाल अधिकारों की रक्षा और संरक्षण की शपथ दिलाई गई। विद्यालय की प्रधानाचार्य शांति देवी ने जिला बाल संरक्षण अधिकारी डॉ. हीरा नंद सहित सभी रिसोर्स पर्सन का शिविर के सफल आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया।











