हिमाचल में सामाजिक न्याय की नई पहल, कानून बनाने की मांग को मिला जनसमर्थन

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सुरभि न्यूज़

परस राम भारती, बंजार / कुल्लू

हिमाचल प्रदेश में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विकास के लिए विशेष कानून बनाने की मांग अब तेज हो गई है। इस मांग को लेकर 1 अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में “सामाजिक न्याय यात्रा” शुरू की गई है। इस यात्रा की शुरुआत जिला चंबा से की गई है और इसे हर विधानसभा क्षेत्र तक ले जाया जाएगा।

इस यात्रा के दौरान “हर घर दस्तक” अभियान चलाया जाएगा, जिसके माध्यम से लोगों को इस कानून की आवश्यकता के बारे में जागरूक किया जाएगा और समर्थन जुटाया जाएगा। अभियान का मुख्य नारा “एक ही मांग, एक ही नारा” है।

राज्य गठबंधन का कहना है कि 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर संबंधित विधायकों के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसमें मांग की जाएगी कि सरकार अपने चुनावी वादे के अनुसार हिमाचल में अनुसूचित जाति और जनजाति विकास निधि कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू करे।

इस मुद्दे को लेकर राज्य गठबंधन पिछले कई वर्षों से प्रयास कर रहा है। मार्च 2023 में गठबंधन का गठन किया गया था, जिसके बाद प्रदेश में पिछले 5 वर्षों के एससी-एसटी विकास कार्यक्रमों का अध्ययन कर एक रिपोर्ट तैयार की गई। इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार के मंत्रियों और विधायकों से कई दौर की चर्चा भी की गई।

गठबंधन के प्रतिनिधियों ने 2024 में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर इस कानून की मांग रखी और एक ड्राफ्ट बिल भी तैयार कर सरकार को सौंपा। इसके अलावा, विभिन्न सत्रों के दौरान भी सरकार से लगातार इस मुद्दे पर कार्रवाई की मांग की जाती रही है।

हालांकि, गठबंधन का आरोप है कि अभी तक सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। इसी कारण अब इस मांग को जन आंदोलन का रूप देते हुए “सामाजिक न्याय यात्रा” शुरू की गई है, ताकि इसे आम जनता और वोट से जोड़ा जा सके।

गठबंधन के प्रतिनिधि सुखदेव विश्वप्रेमी ने प्रदेशवासियों से इस अभियान में सहयोग करने की अपील की है और कहा है कि यह कानून सामाजिक न्याय और समान विकास के लिए बेहद जरूरी है।

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