सुरभि न्यूज़
ख़ुशी राम ठाकुर, मंडी/कांगड़ा
जिला कांगड़ा की दुर्गम छोटाभंगाल और जिला मंडी की चौहार घाटी की कठिन और विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद दोनों क्षेत्रों की अनदेखी से स्थानीय निवासियों और पंचायत प्रतिनिधियों में प्रदेश सरकार के प्रति गहरा रोष व्याप्त है। वर्तमान व पूर्व पंचायत प्रतिनिधियों सहित आम जनता कई वर्षों से सरकारों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर तथा लिखित प्रस्ताव पारित कर अपनी माँगें उठाती आ रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
मुख्य रूप से इन दोनों घाटियों को जनजातीय क्षेत्र (Tribal Area) का दर्जा देने और जिला मंडी की चौहार घाटी की 13 पंचायतों की सुविधा के लिए लगभग 15 वर्ष पूर्व खोली गई उपतहसील टिक्कन को पूर्ण तहसील का दर्जा देने की मांग लंबे समय से लंबित पड़ी है।
अतिरिक्त समय और धन की हो रही बर्बादी
खलैहल पंचायत के प्रधान सुभाष ठाकुर और उपप्रधान भागमल सहित पूरी चौहार घाटी के ग्रामीणों का कहना है कि टिक्कन उपतहसील में केवल नाममात्र के छोटे-मोटे काम ही हो पाते हैं। किसी भी बड़े राजस्व या प्रशासनिक कार्य के निपटाने के लिए स्थानीय लोगों को 30 से 60 किलोमीटर का लंबा सफर तय करके पद्धर और बैजनाथ तहसील जाना पड़ता है। इससे ग्रामीणों का न केवल कीमती समय बर्बाद होता है, बल्कि आर्थिक बोझ भी झेलना पड़ता है।
2002 में मिला था आश्वासन, पर मुद्दा ठंडे बस्ते में गया
प्रतिनिधियों ने पुरानी घटनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2002 में द्रंग क्षेत्र के वरिष्ठ भाजपा नेता स्वर्गीय रमेश शर्मा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल से शिमला सचिवालय स्थित उनके कार्यालय में मिला था। उस समय मुख्यमंत्री ने चौहार घाटी को तत्काल प्रभाव से अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का आरक्षण देने की घोषणा की थी और आश्वासन दिया था कि जनजातीय आरक्षण का मामला केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है, जिस पर आगे कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, वर्ष 2003 में सत्ता परिवर्तन के बाद यह महत्वपूर्ण मुद्दा ठंडे बस्ते में चला गया और आज तक लंबित है।
प्रधान सुभाष ठाकुर, उपप्रधान भागमल और दोनों घाटियों के निवासियों ने प्रदेश सरकार से एक बार फिर से पुरजोर अपील की है कि छोटाभंगाल और चौहार घाटी की दुर्गम परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इन्हें जल्द से जल्द जनजातीय क्षेत्र का दर्जा दिया जाए तथा उपतहसील टिक्कन को तहसील में स्तरोन्नत (अपग्रेड) किया जाए, ताकि क्षेत्रीय जनता को राहत मिल सके।









