सुरभि न्यूज़
प्रताप अरनोट, कुल्लू
सांफिआ फाउंडेशन एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र (DEIC), क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के संयुक्त तत्वावधान में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) जरी, मणिकर्ण में आशा कार्यकर्ताओं के लिए एक दिवसीय क्लीनिकल प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आशा कार्यकर्ताओं की क्षमता को मजबूत करना तथा बच्चों में विकासात्मक विलंब एवं दिव्यांगता की प्रारंभिक पहचान, विकासात्मक माइलस्टोन की निगरानी, समयबद्ध रेफरल और प्रारंभिक हस्तक्षेप सेवाओं के संबंध में व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना रहा।
प्रशिक्षण के दौरान केस स्टडी और संवादात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में विकासात्मक समस्याओं के शुरुआती संकेतों की पहचान, अभिभावकों को उचित परामर्श तथा समयबद्ध रेफरल प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। आशा कार्यकर्ताओं को बताया गया कि बच्चों के विकास की नियमित निगरानी की जाए और किसी भी विकासात्मक चिंता की स्थिति में उन्हें समय रहते उपयुक्त स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाए।
सांफिआ फाउंडेशन की निदेशक डॉ. रेखा ठाकुर ने केंद्र में उपलब्ध विभिन्न थेरेपी सेवाओं और बहु-विषयक प्रारंभिक हस्तक्षेप की कार्यप्रणाली की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बच्चों की आवश्यकताओं के अनुसार फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, स्पीच थेरेपी और विशेष शिक्षा जैसी सेवाएं प्रारंभिक हस्तक्षेप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने इन सेवाओं के लाभ और बच्चों को समय पर संबंधित विशेषज्ञों से जोड़ने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं से समुदाय स्तर पर बच्चों के विकास की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने तथा दिव्यांगता के शुरुआती संकेत मिलने पर समयबद्ध रेफरल करने का आह्वान किया।
समाज सेविका धनेश्वरी ठाकुर ने सांफिआ फाउंडेशन द्वारा संचालित विभिन्न कार्यक्रमों एवं सेवाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने आश बाल विकास केंद्र, समावेशी कार्यक्रम और थेरेपी ऑन व्हील्स सहित अन्य सामुदायिक सेवाओं के बारे में विस्तार से बताया।
वहीं, CHC जरी के चिकित्सा अधिकारी डॉ. अंशुल ने कहा कि विकासात्मक समस्याओं की पहचान के साथ-साथ अभिभावकों को उचित परामर्श देना भी बेहद महत्वपूर्ण है, ताकि माता-पिता बच्चे की आवश्यकताओं को समझ सकें और समय पर जरूरी सेवाओं का लाभ उठा सकें। उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं को बच्चों के विकासात्मक माइलस्टोन चार्ट का नियमित अवलोकन एवं निगरानी करने के लिए प्रेरित किया।
डॉ. अंशुल ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए कहा कि इस तरह के क्षमता-विकास कार्यक्रम आशा कार्यकर्ताओं को समुदाय स्तर पर बच्चों की प्रारंभिक पहचान, अभिभावक परामर्श और समयबद्ध रेफरल में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने में मदद करेंगे।
कार्यशाला में महेश तथा स्वास्थ्य शिक्षक राजकुमार भी उपस्थित रहे।











