सुरभि न्यूज़
रंजीत लाहौली, केलांग : लाहौल।
जनजातीय जिला लाहौल की मयाड़ घाटी के करपट गांव के किसानों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। गांव को जोड़ने वाला पुल अभी भी पानी में डूबा हुआ है, जिसके चलते किसानों को अपनी तैयार फसलें सड़क तक पहुंचाने के लिए जान जोखिम में डालकर झूले का सहारा लेना पड़ रहा है।
करपट गांव में फूलगोभी की फसल इस समय तैयार है और खेतों में गोभी ओवरसाइज होने लगी है। किसानों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है कि समय पर फसल मंडी तक नहीं पहुंची तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
एक पेटी गोभी सड़क तक पहुंचाने के 80 से 100 रुपये गांव की मौजूदा स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि किसानों को एक पेटी गोभी सड़क तक पहुंचाने के लिए नेपाली मजदूरों को करीब 80 से 100 रुपये तक देने पड़ रहे हैं। मजदूरों के साथ किसान लगभग दो किलोमीटर पैदल चलकर अपनी फसल सड़क तक पहुंचा रहे हैं। इसके बाद ही फसल मंडी के लिए रवाना हो पा रही है।
वहीं, व्यापारियों द्वारा किसानों को फूलगोभी की कीमत करीब 18 रुपये प्रति किलो दी जा रही है। ऐसे में फसल को खेत से सड़क तक पहुंचाने में हो रहा अतिरिक्त खर्च किसानों की कमर तोड़ रहा है।
बच्चों की पढ़ाई और परिवार पालने का सपना टूटा
किसानों का कहना है कि उन्होंने फूलगोभी की फसल से अच्छी आमदनी की उम्मीद लगाई थी। इसी आमदनी से बच्चों की पढ़ाई, उनके भविष्य और परिवार की जरूरतें पूरी करने का सपना देखा था। लेकिन प्राकृतिक आपदा और सड़क संपर्क बाधित होने के कारण अब उनकी मेहनत पर संकट खड़ा हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि लोक निर्माण विभाग की ओर से झूला लगाने का काम शुरू किया गया है, लेकिन जब तक पुल पर आवाजाही बहाल नहीं होती, तब तक किसानों की परेशानी बनी रहेगी।
जान जोखिम में डालकर झूला पार कर रही महिलाएं
करपट गांव की महिलाएं भी अपनी फसल और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए जान जोखिम में डालकर झूला पार करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों के चेहरों पर चिंता साफ नजर आ रही है। किसानों का कहना है कि अगर जल्द पुल को ठीक कर आवाजाही बहाल नहीं की गई तो तैयार फसल खराब हो सकती है और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।












