साहित्य जगत : राजभाषा पखवाड़े में बाल कवि सम्मेलन और बहुभाषी कवि सम्मेलन का आयोजन

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सुरभि न्यूज़

बिलासपुर, 11 सितंबर

भाषा एवं संस्कृति विभाग, जिला भाषा एवं संस्कृति अधिकारी कार्यालय बिलासपुर द्वारा राजभाषा पखवाड़ा-2026 के अंतर्गत हार्मनी ऑफ हिमालयाज पब्लिक स्कूल, बिलासपुर में बाल कवि सम्मेलन, ‘साहित्यकार/कलाकार से मिलिए’ तथा बहुभाषी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल तथा उपस्थित साहित्यकारों एवं कलाकारों ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित एवं माल्यार्पण कर किया।

इसके पश्चात नरेंद्र दत्त, अभिषेक तथा विद्यालय के विद्यार्थियों ने मां सरस्वती की मधुर संगीतमय वंदना प्रस्तुत की। कार्यक्रम का मंच संचालन प्रेरणा ने किया।
बाल कवि सम्मेलन में बच्चों ने बांधा समां
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में बाल कवि सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें स्कूली बच्चों ने अपनी सुंदर काव्य प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल ने प्रतिभागी बच्चों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।

इसी सत्र में ‘साहित्यकार से मिलिए’ कार्यक्रम के तहत रचना शर्मा ने प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. अनेक राम सांख्यान के जीवन-वृत्त एवं साहित्यिक कृतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं मंजुल मेहता ने साहित्यकार सीता जसवाल के जीवन परिचय और उनकी रचनाधर्मिता से श्रोताओं को अवगत करवाया। साहित्य, समाजसेवा एवं मानवीय मूल्यों के संवर्धन में योगदान के लिए विभाग की ओर से दोनों साहित्यकारों को हिमाचली टोपी, मफलर, डायरी एवं पेन भेंट कर सम्मानित किया गया।
बहुभाषी कवि सम्मेलन में साहित्य की छटा
द्वितीय सत्र में बहुभाषी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न साहित्यकारों एवं कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर कार्यक्रम को साहित्यिक रंग प्रदान किया। कवि रवीन्द्र कुमार शर्मा ने पपीहे की प्रतीक्षा और स्वाति नक्षत्र की बूंदों पर आधारित रचना प्रस्तुत की। संदेश शर्मा ने ‘हिन्दी का सम्मान करें’, जीत राम सुमन ने ‘रूठ गई बहारें हमसे’ तथा डॉ. अनेक राम सांख्यान ने ‘ऐ राजभाषा तुझे सलाम, ऐ राष्ट्रभाषा तुझे प्रणाम’ गीत प्रस्तुत किया।

शमशेर सिंह चंदेल ने ‘तभी तो हिन्दी नायाब है’, सीता जसवाल ने प्रकृति और निरंतर प्रगति का संदेश देती रचना, सुषमा खजूरिया ने ‘संस्कृति ज्ञान है हिन्दी, सभ्यता की जन है हिन्दी’ तथा रविंद्र चंदेल कमल ने ‘वंदन तुझे वंदन, हे राजभाषा तुझे वंदन’ प्रस्तुत किया। बृज लाल लखनपाल ने ‘हिन्दी में अंग्रेजी, अंग्रेजी में हिन्दी’, अरुण डोगरा रीतू ने सामाजिक संवेदनाओं पर आधारित रचना, सुनील शर्मा ने ‘सोशल मीडिया का सच’, कौशल्या देवी ने ‘हिन्दी का वर्चस्व-भारत मां की शान है हिन्दी’ तथा डॉ. शालिनी शर्मा ने ‘शब्दों की शान-हिन्दी, संस्कृति और श्री कृष्ण’ विषय पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।

इसके अतिरिक्त केशव शर्मा, यश शर्मा, प्रेरणा, गायत्री शर्मा और रचना शर्मा ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। कौशल्या देवी एवं संदेश शर्मा द्वारा प्रस्तुत पहाड़ी गीत को नरेंद्र दत्त शर्मा और अभिषेक के मधुर संगीत ने विशेष आकर्षण प्रदान किया।
इस अवसर पर डॉ. शालिनी शर्मा के जन्मदिवस पर उपस्थित साहित्यकारों एवं प्रबुद्धजनों ने उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में जलपान की व्यवस्था डॉ. शालिनी शर्मा द्वारा की गई।
हिन्दी सांस्कृतिक चेतना और अस्मिता का सशक्त माध्यम : नीलम चंदेल
कार्यक्रम के समापन पर जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल ने सभी साहित्यकारों एवं कवियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल हमारी राजभाषा ही नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक चेतना, अस्मिता और जन-जन के विचारों के आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम है। हिंदी भारतीय संस्कृति को एकता के सूत्र में पिरोने वाली संवाहिका है, जो विविधताओं का सम्मान करते हुए सभी को जोड़ती है।

उन्होंने कहा कि हिंदी हमारी समृद्ध ज्ञान परंपरा, चेतना और सांस्कृतिक धरोहर की आधारशिला है। हिंदी के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार के साथ ऐसे बहुभाषी साहित्यिक आयोजनों से विभिन्न भाषाओं और बोलियों के साहित्य को साझा मंच मिलता है।

नीलम चंदेल ने कहा कि दैनिक व्यवहार एवं प्रशासनिक कार्यों में हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग ही इसे वास्तविक सम्मान दिला सकता है। ऐसे आयोजन साहित्यकारों को रचनात्मक अभिव्यक्ति का अवसर देने के साथ-साथ नई पीढ़ी को मातृभाषा, लोक संस्कृति, साहित्य और मानवीय मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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