प्रदेश कर्ज के बोझ तले दबा जा रहा, सरकार बताए कर्ज लेकर पैसा कहां किया खर्च – अमित सूद

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सुरभि न्यूज़
प्रताप अरनोट, कुल्लू : 23 सितंबर

जिला भाजपा अध्यक्ष अमित सूद ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर लगातार बढ़ते कर्ज को लेकर निशाना साधते हुए सरकार से कर्ज की राशि के उपयोग का पूरा हिसाब जनता के सामने रखने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश पर लगातार बढ़ते कर्ज के बावजूद हिमाचल की आर्थिक स्थिति में सुधार क्यों नहीं दिखाई दे रहा और विकास कार्यों में तेजी क्यों नहीं आ रही, सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।

अमित सूद ने कहा कि सरकार को केवल नया कर्ज लेने की जानकारी देने के बजाय यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि कितना कर्ज लिया गया, पुराने कर्ज में से कितनी राशि चुकाई गई और नए कर्ज की राशि किन कार्यों पर खर्च की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार कर्ज लेकर पुराने कर्ज की अदायगी और नियमित खर्च चलाने के चक्र में फंसती जा रही है। यदि ऐसा है तो प्रदेश के विकास, रोजगार और नई परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन कहां से आएंगे।

उन्होंने बढ़ते ब्याज के बोझ को भी प्रदेश के भविष्य के लिए गंभीर विषय बताया। उन्होंने कहा कि सरकार को ब्याज और मूलधन की अदायगी का पूरा रोडमैप जनता के सामने रखना चाहिए। यदि कर्ज की राशि विकास और रोजगार सृजन में खर्च की जा रही है तो उसका भी विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

भाजपा जिला अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस सत्ता में आने से पहले वित्तीय अनुशासन और जनता को राहत देने के बड़े-बड़े दावे करती थी, लेकिन अब प्रदेश के सामने बढ़ता कर्ज और वित्तीय दबाव जैसे सवाल खड़े हैं। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान कांग्रेस सरकार ने अपने चार वर्ष के कार्यकाल में विकासात्मक कार्यों के लिए करीब 45 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया है, लेकिन विकास के नाम पर अपेक्षित काम नजर नहीं आ रहे हैं।

अमित सूद ने आरोप लगाया कि सुक्खू सरकार प्रदेश की आर्थिक व्यवस्था को ऐसे कर्ज के चक्र में धकेल रही है, जिसका बोझ वर्तमान के साथ आने वाली पीढ़ियों को भी उठाना पड़ सकता है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि सत्ता संभालने के बाद लिए गए सभी ऋणों, पुराने ऋणों की अदायगी, ब्याज भुगतान और ऋण से किए गए खर्च का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक करने के लिए श्वेत पत्र जारी किया जाए।

उन्होंने कहा कि हिमाचल की जनता को कर्ज का आंकड़ा नहीं, कर्ज का हिसाब चाहिए। सरकार को हर रुपये का जवाब सार्वजनिक करना चाहिए।

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