स्व. उर्मि कृष्ण की स्मृति में 22वां क्षेत्रीय कवि-लेखक मिलन शिविर आयोजित

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सुरभि न्यूज़ 

शिलांग, 05 अक्टूबर

पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी, शिलांग की ओर से वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार स्वर्गीय उर्मि कृष्ण की पहली पुण्यतिथि के अवसर पर रविवार को श्री राजस्थान विश्राम भवन (मारवाड़ी धर्मशाला), गाड़ीखाना में 22वां क्षेत्रीय कवि-लेखक मिलन शिविर आयोजित किया गया। करीब तीन घंटे चले इस साहित्यिक एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शिलांग सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र के अनेक कवि, लेखक और साहित्यप्रेमी शामिल हुए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बिमल बजाज ने की। केंद्रीय हिंदी संस्थान, शिलांग के क्षेत्रीय निदेशक प्रो. पार्थ सारथी पाण्डेय मुख्य अतिथि तथा जवाहर नवोदय विद्यालय, मौसिनराम, ईस्ट खासी हिल्स के हिंदी शिक्षक जान मोहम्मद अंसारी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संयोजन अकादमी के सचिव डॉ. अकेलाभाइ ने किया, जबकि संचालन आयोजन सचिव डॉ. अरुणा कुमारी उपाध्याय ने किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ रूमा अधिकारी द्वारा प्रस्तुत वंदना से हुआ। इसके बाद मंचस्थ अतिथियों एवं साहित्यकारों ने स्व. उर्मि कृष्ण के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। जान मोहम्मद अंसारी ने भक्तिगीत प्रस्तुत किया।

मुख्य अतिथि प्रो. पार्थ सारथी पाण्डेय ने स्व. उर्मि कृष्ण को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि पहली पुण्यतिथि पर पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी का पूरा परिवार उन्हें नमन करता है। उन्होंने कहा कि उर्मि कृष्ण भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनकी स्मृतियां, साहित्यिक संबंध और अकादमी परिवार के साथ उनका आत्मीय जुड़ाव हमेशा जीवित रहेगा।

अकादमी के सचिव डॉ. अकेलाभाइ ने अपनी श्रद्धांजलि-वाणी में उर्मि कृष्ण के साहित्यिक योगदान, आत्मीय व्यक्तित्व और साहित्य के प्रति उनके समर्पण को याद किया। उन्होंने कहा कि कुछ व्यक्तित्व अपने जाने के बाद भी अपनी रचनाओं, विचारों और आत्मीय संबंधों के माध्यम से हमारे बीच जीवित रहते हैं। उर्मि कृष्ण भी ऐसी ही साहित्यिक विभूति थीं, जिनकी स्मृतियां साहित्य जगत को निरंतर प्रेरित करती रहेंगी।

इस अवसर पर उपस्थित साहित्यकारों ने एक मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा के प्रति श्रद्धा व्यक्त की। इसके बाद आयोजित काव्यांजलि सत्र में कवियों एवं साहित्यकारों ने अपनी स्वरचित रचनाओं के माध्यम से स्व. उर्मि कृष्ण को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। दया शर्मा, रीता घोष, आशा पुरकायस्थ, नीता नवीन शर्मा, डॉ. नमी दास, डॉ. रीना रेगमी, डॉ. टेकनारायण उपाध्याय, विवेकानंद पंडित, बिनोद कुमार, करुणा शर्मा, मनोज तिवारी, कुमारी आर्यमा उपाध्याय, संजय कुमार, राम सेवक सिंह,  मल्लिका दे सहित अन्य साहित्यकारों ने काव्य-पाठ किया। रूमा अधिकारी ने महामृत्युंजय मंत्र का सामूहिक जाप कराया, जिससे कार्यक्रम का वातावरण आध्यात्मिक एवं भावुक हो उठा। काव्य-पाठ के दौरान कई ऐसे क्षण आए, जब साहित्यकारों की आंखें नम हो गईं।

अकादमी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बिमल बजाज ने भी अपनी कविताओं के माध्यम से उर्मि कृष्ण के प्रति भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि उर्मि दीदी आज शरीर से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी के जिन-जिन लेखक मिलन शिविरों में उन्होंने भाग लिया, वहां उनकी स्मृतियां आज भी जीवंत हैं। उनकी साहित्यिक यात्रा, पत्रकारिता और लेखन को साहित्य जगत ने अपने-अपने ढंग से सम्मान दिया, लेकिन उनके लिए उर्मि कृष्ण की सबसे बड़ी पहचान उनका आत्मीय व्यक्तित्व था।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि किसी साहित्यकार का वास्तविक जीवन केवल उसके लेखन तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसकी रचनाओं और समाज के साथ स्थापित आत्मीय संबंधों में भी उसकी उपस्थिति बनी रहती है। उर्मि कृष्ण की स्मृति में आयोजित यह कार्यक्रम केवल पुण्यतिथि आयोजन नहीं, बल्कि साहित्यिक संबंधों, संवेदनाओं और मानवीय मूल्यों को सहेजने का सार्थक प्रयास है।

डॉ. अकेलाभाइ ने अपने भावुक वक्तव्य में कहा कि उर्मि कृष्ण उनके लिए केवल गुरु-पत्नी नहीं थीं, बल्कि समय के साथ वे उनकी ‘उर्मि दीदी’ बन गई थीं। उन्होंने बताया कि 24 अक्टूबर 2025 को अंबाला छावनी से उनके निधन का समाचार मिला तो ऐसा लगा जैसे साहित्यिक परिवार का कोई अपना सदस्य अचानक दूर चला गया हो। उन्होंने कहा कि समय बीतने के साथ कुछ लोग स्मृतियों से दूर नहीं होते, बल्कि और गहराई से उनमें बस जाते हैं। उर्मि दीदी भी ऐसी ही आत्मीय शख्सियत थीं।

अंत में डॉ. अकेलाभाइ ने सभी अतिथियों, कवियों, साहित्यकारों एवं साहित्यप्रेमियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी भविष्य में भी साहित्यिक विभूतियों की स्मृतियों को जीवंत रखने तथा साहित्यिक संवाद और सृजन की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगी।

भावपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ यह 22वां क्षेत्रीय कवि-लेखक मिलन शिविर स्व. उर्मि कृष्ण के प्रति साहित्यिक समाज की आत्मीय श्रद्धा, सम्मान और उनके स्थायी साहित्यिक योगदान का सशक्त स्मरण बन गया।

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