सुरभि न्यूज़
केलांग, 6 अक्टूबर
चाइल्ड हेल्पलाइन यूनिट लाहौल-स्पीति, जिला बाल संरक्षण इकाई लाहौल-स्पीति तथा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय शांशा के संयुक्त तत्वावधान में विद्यालय परिसर में बाल अधिकार, बाल संरक्षण एवं किशोर स्वास्थ्य विषय पर एक दिवसीय जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर में विद्यालय की कक्षा 6 से 12 तक के छात्र-छात्राओं सहित स्थानीय महिला मंडल शांशा की सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में करीब 95 प्रतिभागी उपस्थित रहे।
शिविर का मुख्य उद्देश्य बच्चों, अभिभावकों और समुदाय को बाल अधिकारों, बाल संरक्षण कानूनों, सरकारी योजनाओं तथा किशोर स्वास्थ्य से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध करवाना रहा। कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों को सुरक्षित बचपन और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए जागरूक किया गया।
संरक्षण अधिकारी (संस्थागत) जोगिंदर कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि बच्चा अपराधी नहीं, बल्कि देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाला व्यक्ति है। उन्होंने किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी देते हुए चाइल्ड इन नीड ऑफ केयर एंड प्रोटेक्शन (CNCP) तथा चाइल्ड इन कॉन्फ्लिक्ट विद लॉ (CICL) से संबंधित प्रक्रियाओं को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि जिले में चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 चौबीसों घंटे कार्यरत है।
जिला बाल संरक्षण अधिकारी डॉ. हीरा नंद ने बाल अधिकारों की जानकारी देते हुए कहा कि बच्चों को जीने, संरक्षण, विकास और सहभागिता का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006, POCSO अधिनियम 2012 और बाल श्रम निषेध अधिनियम सहित विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री कन्यादान योजना और स्पॉन्सरशिप योजना जैसी सरकारी योजनाओं के बारे में भी बताया। उन्होंने महिला मंडल की सदस्यों से गांव स्तर पर बाल विवाह और बाल श्रम जैसी गतिविधियों पर नजर रखने तथा ऐसी किसी भी स्थिति की तत्काल सूचना संबंधित विभाग को देने का आह्वान किया।
प्रधान ग्राम पंचायत शांशा प्रशांत ने कहा कि पंचायत बच्चों के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने पंचायत स्तर पर बाल संरक्षण समिति को सक्रिय करने तथा स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया।
स्पेशलाइज्ड एडॉप्शन एजेंसी (SAA), केलांग की समन्वयक श्रीमती कविता ढीसा ने दत्तक ग्रहण की कानूनी प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने अनाथ एवं परित्यक्त बच्चों के अधिकारों तथा CARA के माध्यम से कानूनी रूप से गोद लेने की प्रक्रिया को समझाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि गैर-कानूनी तरीके से बच्चों को गोद लेना अपराध है।
चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की काउंसलर श्रीमती शशि धीमान ने बच्चों को सरल एवं सहज भाषा में गुड टच-बैड टच, साइबर बुलिंग, सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग तथा मानसिक तनाव से निपटने के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने इंटरैक्टिव सत्र के दौरान बच्चों के सवालों के जवाब भी दिए और उन्हें किसी भी समस्या या परेशानी की स्थिति में बिना डर अपनी बात रखने के लिए प्रेरित किया।
वहीं PHC शांशा के चिकित्सा अधिकारी डॉ. निर्भय भानु ने किशोरावस्था के दौरान होने वाले शारीरिक एवं मानसिक बदलावों, माहवारी स्वच्छता प्रबंधन, संतुलित पोषण, एनीमिया की रोकथाम तथा नशा मुक्ति पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि PHC शांशा में प्रत्येक बुधवार को किशोर स्वास्थ्य क्लिनिक आयोजित किया जाता है, जहां किशोर-किशोरियां स्वास्थ्य संबंधी परामर्श प्राप्त कर सकते हैं।
विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री अशोक कुमार ने शिविर के आयोजन के लिए सभी संबंधित विभागों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्र लाहौल-स्पीति के बच्चों के लिए इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने विद्यालय में बाल अधिकार क्लब के गठन की बात भी कही।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को बाल अधिकारों की शपथ दिलाई गई तथा जागरूकता सामग्री वितरित की गई। कार्यक्रम का मंच संचालन विद्यालय के अध्यापक ने किया।
इस अवसर पर विद्यालय का स्टाफ, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, महिला मंडल की प्रधान सहित कुल 95 प्रतिभागी उपस्थित रहे।











