छोटाभंगाल घाटी में एंबुलेंस की सुविधा और बंद सरकारी केंद्रों को लेकर लोगों में रोष

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सुरभि न्यूज़ / खुशी राम ठाकुर, बरोट

वर्षों से उठ रही मांग पर नहीं हुआ अमल, स्वास्थ्य सुविधा के लिए बरोट की एंबुलेंस पर निर्भर घाटीवासी; मुल्थान में कृषि व उद्यान प्रसार केंद्रों पर वर्षों से लटके हैं ताले

बैजनाथ विधानसभा क्षेत्र की दुर्गम छोटाभंगाल घाटी के लोगों ने घाटी के लिए अलग से एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध करवाने की मांग एक बार फिर जोरदार तरीके से उठाई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई वर्षों से सरकार और प्रशासन के समक्ष मांग रखने के बावजूद अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। एंबुलेंस सुविधा के अभाव में आपात स्थिति में मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

जनकल्याण सभा के प्रदेशाध्यक्ष चुनी लाल ने कहा कि घाटीवासियों की ओर से पिछले कई वर्षों से छोटाभंगाल के लिए एंबुलेंस उपलब्ध करवाने की मांग की जा रही है। उन्होंने बताया कि जिला परिषद बनने के बाद उन्होंने भी सरकार और जिला प्रशासन के समक्ष इस संबंध में लिखित प्रस्ताव पारित कर भेजा था, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि छोटाभंगाल घाटी की बड़ाग्रां, कोठी कोहड़, धरमान, मुल्थान, लोआई, स्वाड़ तथा पोलिंग पंचायतों के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। घाटी के एक छोर कोठी कोहड़-दयोट तथा दूसरे छोर लोहारडी में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र स्थित हैं। दोनों क्षेत्रों के बीच करीब 20 किलोमीटर की दूरी है।

चुनी लाल ने कहा कि छोटाभंगाल घाटी में किसी मरीज की हालत गंभीर होने पर लोगों को जिला मंडी की चौहार घाटी में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरोट की सरकारी एंबुलेंस पर निर्भर रहना पड़ता है। कई बार एंबुलेंस उपलब्ध न होने या समय पर नहीं पहुंच पाने की स्थिति में मरीजों को निजी अथवा किराये के वाहनों से अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। आपातकालीन स्थिति में एक-एक मिनट महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में घाटी के लिए अलग एंबुलेंस उपलब्ध होना बेहद जरूरी है।

चुनी लाल ने सरकार और प्रशासन पर घाटी की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि छोटाभंगाल के लोगों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि घाटी के लिए तत्काल एंबुलेंस उपलब्ध करवाकर लोगों को राहत दी जाए।

राम लाल सहित घाटी के अन्य लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि वर्तमान सरकार और प्रशासन की ओर से जल्द एंबुलेंस सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई गई तो घाटी के सैकड़ों लोग आंदोलन करने और सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे।
मुल्थान में कृषि और उद्यान प्रसार केंद्रों पर वर्षों से ताले
वहीं, छोटाभंगाल घाटी के किसानों और बागवानों की सुविधा के लिए मुल्थान में स्थापित किए गए फल संतति एवं उद्यान प्रसार केंद्र तथा कृषि प्रसार केंद्र की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दोनों केंद्र लंबे समय से बंद पड़े हैं और इन पर ताले लटके हुए हैं।

मुल्थान पंचायत के प्रधान सुरेंद्र कुमार ने बताया कि फल संतति एवं उद्यान प्रसार केंद्र में पिछले करीब पांच-छह वर्षों से एचडीओ का पद खाली पड़ा है। वहीं महिला चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने के बाद केंद्र की स्थिति और खराब हो गई है। इसके चलते केंद्र पर लंबे समय से ताला लटका हुआ है।

उन्होंने बताया कि कृषि प्रसार केंद्र भी पिछले करीब पांच-छह वर्षों से कृषि प्रसार अधिकारी का पद खाली होने के कारण बंद पड़ा है। इससे घाटी के किसानों और बागवानों को विभागीय योजनाओं, तकनीकी मार्गदर्शन, पौधों तथा कृषि-बागवानी संबंधी अन्य सुविधाओं का लाभ लेने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों का रुख करना पड़ता है।

प्रधान सुरेंद्र कुमार ने कहा कि सरकार ने किसानों और बागवानों की सुविधा के लिए इन केंद्रों की स्थापना की थी, लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों के पद खाली होने के कारण दोनों जनकल्याणकारी केंद्र महज औपचारिकता बनकर रह गए हैं।

उन्होंने सरकार से मांग की कि दोनों केंद्रों में रिक्त पदों को जल्द भरा जाए और इन्हें दोबारा नियमित रूप से शुरू किया जाए, ताकि छोटाभंगाल घाटी के किसानों और बागवानों को स्थानीय स्तर पर कृषि एवं उद्यान विभाग की सुविधाएं मिल सकें।

सुरेंद्र कुमार ने बैजनाथ के विधायक किशोरी लाल से भी इस मामले में हस्तक्षेप कर सरकार और संबंधित विभाग के समक्ष प्रभावी ढंग से मामला उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों के सुचारू रूप से संचालन से घाटी के किसानों और बागवानों को काफी लाभ मिलेगा।

स्थानीय लोगों ने सरकार और प्रशासन से एक ओर छोटाभंगाल घाटी के लिए तत्काल एंबुलेंस उपलब्ध करवाने तथा दूसरी ओर मुल्थान में वर्षों से बंद पड़े कृषि एवं उद्यान प्रसार केंद्रों को रिक्त पद भरकर दोबारा शुरू करने की मांग की है।

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