Listen to this article
सुरभि न्यूज़ / प्रताप अरनोट, केलांग
केलांग, 8 अक्तूबर
केलांग, 8 अक्तूबर
जिला मुख्यालय के डीसी कार्यालय के सम्मेलन कक्ष में गुरुवार को सड़क सुरक्षा से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों को लेकर बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त-सह-अध्यक्ष, जिला सड़क सुरक्षा समिति लाहौल-स्पीति किरण भड़ाना ने की। बैठक में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम, यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में सड़क इंजीनियरिंग से जुड़े विषयों की समीक्षा करते हुए सड़क की ज्यामितीय संरचना, जंक्शन एवं इंटरसेक्शन प्रबंधन, पेवमेंट और सड़क निर्माण सामग्री, यातायात नियंत्रण उपकरण, डेलीनेटर तथा सड़क किनारे सुरक्षा उपायों पर चर्चा हुई। दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने तथा सड़क अवसंरचना को सुरक्षित बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
उपायुक्त किरण भड़ाना ने विद्यार्थियों और आम जनता में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आवश्यक सुरक्षा आदतों, परिस्थितिजन्य जागरूकता, सही समय पर निर्णय लेने की क्षमता तथा ‘गुड सेमेरिटन’ से संबंधित जागरूकता को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
बैठक में दुर्घटना के बाद गोल्डन ऑवर के दौरान त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध करवाने तथा एंबुलेंस के लिए आपातकालीन कॉल सेवाओं को मजबूत करने पर भी विचार-विमर्श किया गया। प्रवर्तन एवं निगरानी व्यवस्था के तहत वाहन चालकों से यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करवाने, नियमों के उल्लंघन की निगरानी तथा आवश्यक दंडात्मक कार्रवाई से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई।
सड़क दुर्घटनाओं के विश्लेषण के दौरान ओवरस्पीडिंग, मानवीय त्रुटियों और यातायात नियमों के उल्लंघन से जुड़े दुर्घटना आंकड़ों की समीक्षा की गई। इसके साथ ही बुनियादी ढांचे और प्रवर्तन व्यवस्था में मौजूद कमियों को दूर करने तथा चिन्हित ब्लैक स्पॉट पर की गई कार्रवाई की समीक्षा करते हुए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने पर जोर दिया गया।
बैठक में उन्नत एवं इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से यातायात व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से सुदृढ़ करने पर भी चर्चा हुई। इसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी, सर्विलांस कैमरे, स्पीड एवं नंबर प्लेट डिटेक्शन सेंसर, रोडसाइड फोन तथा एंबुलेंस और पेट्रोलिंग इकाइयों के त्वरित प्रेषण के लिए कमांड एवं कंट्रोल सेंटर जैसी व्यवस्थाओं पर विचार किया गया।
इसके अलावा स्कूल जोन सुरक्षा, व्यावसायिक वाहनों के नियमों का अनुपालन, वाहन फिटनेस की निगरानी, फिटनेस प्रमाणपत्र, स्पीड लिमिटिंग डिवाइस, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र और अनिवार्य सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता जैसे विषय भी बैठक के प्रमुख एजेंडे में शामिल रहे।
चालकों के प्रशिक्षण और थकान से जुड़े जोखिमों पर चर्चा
बैठक में वाहन चालकों के लिए डिफेंसिव ड्राइविंग, प्री-ट्रिप निरीक्षण और सतत प्रशिक्षण की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। चालकों को थकान, ध्यान भटकने तथा अन्य जोखिमों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ चालक प्रशिक्षण एवं वार्षिक रिफ्रेशर कार्यक्रम आयोजित करने पर जोर दिया गया।
बैठक में वाहन चालकों के लिए डिफेंसिव ड्राइविंग, प्री-ट्रिप निरीक्षण और सतत प्रशिक्षण की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। चालकों को थकान, ध्यान भटकने तथा अन्य जोखिमों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ चालक प्रशिक्षण एवं वार्षिक रिफ्रेशर कार्यक्रम आयोजित करने पर जोर दिया गया।
वाहनों के नियमित रखरखाव, यांत्रिक मानकों तथा दुर्घटना-मुक्त वाहन चालकों को प्रोत्साहित करने के लिए सुरक्षा पुरस्कार देने संबंधी प्रस्तावों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
युवाओं को ‘सड़क सुरक्षा मित्र’ के रूप में जोड़ने पर जोर
सड़क सुरक्षा मित्र (SSM) प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 18 से 28 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को प्रशिक्षण देकर जिला सड़क सुरक्षा समितियों के साथ जोड़ने और सड़क सुरक्षा गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से संचालित करने तथा युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
सड़क सुरक्षा मित्र (SSM) प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत 18 से 28 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को प्रशिक्षण देकर जिला सड़क सुरक्षा समितियों के साथ जोड़ने और सड़क सुरक्षा गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से संचालित करने तथा युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
बैठक में सड़क अवसंरचना से संबंधित खराब पेवमेंट, अपर्याप्त स्किड रेजिस्टेंस, संकरे अथवा अनुपस्थित शोल्डर, दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट, सड़क की खराब ज्यामिति, अपर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा अवरोधकों की कमी जैसे मुद्दों की भी समीक्षा की गई।
उपायुक्त ने संबंधित विभागों को उनके कार्यक्षेत्र से जुड़े विषयों पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सड़क सुरक्षा के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया।
बैठक में उपमंडल दंडाधिकारी कुनिका ऐकर्स, डीएफओ इंद्रजीत सीरा, पुलिस अधीक्षक शिवानी मेहला, उप पुलिस अधीक्षक केडी शर्मा, अधिशाषी अभियंता विद्युत विभाग सूर्या शर्मा, अधिशाषी अभियंता लोक निर्माण विभाग अश्वनी गुलेरिया, तहसीलदार विकास कुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एम.के. गांधी, आरएम एचआरटीसी अंशित शर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।











