सुरभि न्यूज़ / जोगिंदर नगर, 8 अक्तूबर
RCFC संस्थान को जोगिंदर नगर से सोलन स्थानांतरित करने के निर्णय के खिलाफ चल रहा आंदोलन अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है। केंद्रीय आयुष मंत्रालय में आयुष मंत्री के साथ बातचीत के लिए मुलाकात का समय मिलने के बाद RCFC बचाओ संघर्ष समिति का एक प्रतिनिधिमंडल गुरुवार शाम दिल्ली के लिए रवाना हुआ।
संघर्ष समिति के संयोजक एवं जिला परिषद सदस्य कुशाल भारद्वाज ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल में संघर्ष समिति के महासचिव एवं वरिष्ठ रोटेरियन अजय ठाकुर, अध्यक्ष गुरुशरण परमार, सलाहकार एवं सेवानिवृत्त डीएसपी ज्ञान चंद ठाकुर, सह-संयोजक एवं पूर्व जिला परिषद सदस्य संजीव शर्मा सहित संघर्ष समिति के पदाधिकारी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली में के.के. सकलानी के नेतृत्व में कुछ अन्य सदस्य भी प्रतिनिधिमंडल से जुड़ेंगे। इसके अलावा हरियाणा तथा अन्य राज्यों के लाभान्वित किसान भी इस प्रयास में शामिल होंगे।
कुशाल भारद्वाज ने कहा कि संघर्ष समिति को उम्मीद है कि केंद्रीय आयुष मंत्रालय जोगिंदर नगर से संस्थान को सोलन स्थानांतरित करने संबंधी पूर्व नोटिफिकेशन को रद्द करेगा। उन्होंने कहा कि जोगिंदर नगर के इस प्रतिष्ठित संस्थान को यहीं बनाए रखने के साथ इसे और सुदृढ़ करने तथा संस्थान के संचालन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय उचित कदम उठाएगा।
RCFC बचाओ संघर्ष समिति की क्रमिक भूख हड़ताल गुरुवार को 50वें दिन में प्रवेश कर गई। कुशाल भारद्वाज ने कहा कि यह केवल संघर्ष समिति की भूख हड़ताल नहीं, बल्कि जोगिंदर नगर की जनता का अपने संस्थान को बचाने के लिए चलाया जा रहा सामूहिक और एकजुट प्रयास है।
उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर केंद्र एवं प्रदेश सरकार के मुखियाओं सहित संबंधित मंत्रियों को कई ज्ञापन भेजे जा चुके हैं। इसके अलावा संघर्ष समिति की ओर से तीन बड़े प्रदर्शन भी आयोजित किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर हमीरपुर, कांगड़ा और मंडी के लोकसभा सांसदों अनुराग ठाकुर, डॉ. राजीव भारद्वाज और कंगना रनौत तथा राज्यसभा सदस्य अनुराग शर्मा से भी मुलाकात की जा चुकी है। उनके अनुसार, सभी नेताओं का रुख इस मुद्दे पर सकारात्मक रहा है।
कुशाल भारद्वाज ने संस्थान को सोलन स्थानांतरित करने के निर्णय को लेकर स्थानीय राजनीतिक नेतृत्व पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि संस्थान की शिफ्टिंग केवल संस्थान के संचालकों की कमियों के कारण नहीं हुई, बल्कि केंद्र और प्रदेश में सत्तारूढ़ दलों के जोगिंदर नगर में मौजूदा कमजोर नेतृत्व की भूमिका भी इसके लिए जिम्मेदार है।
उन्होंने कहा कि यदि नेतृत्व सजग और मजबूत हो तो नए संस्थान क्षेत्र में आते हैं, जबकि कमजोर नेतृत्व के कारण पहले से स्थापित संस्थान भी बाहर चले जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 50 दिनों की भूख हड़ताल के दौरान जनता आंदोलन में डटी रही, लेकिन कई नेता स्वयं आंदोलन से दूर रहे और उनके समर्थकों ने भी दूरी बनाए रखी।
संघर्ष समिति के नेतृत्व ने हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय नेता अजय जमवाल से भी इस मामले को लेकर बातचीत की। कुशाल भारद्वाज के अनुसार, अजय जमवाल का रुख सकारात्मक रहा है और उन्होंने जोगिंदर नगर के संस्थान को बचाने के लिए संबंधित मंत्रालय से बातचीत करने का आश्वासन दिया है।
दिल्ली प्रतिनिधिमंडल से सकारात्मक परिणाम की उम्मीद
कुशाल भारद्वाज ने कहा कि संघर्ष समिति के कई पदाधिकारी दिल्ली रवाना हुए हैं, जबकि वह स्वयं और कुछ अन्य पदाधिकारी स्थानीय स्तर पर आंदोलन का मोर्चा संभालेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि आयुष मंत्री के साथ होने वाली बैठक का सकारात्मक परिणाम सामने आएगा और जोगिंदर नगर का संस्थान जोगिंदर नगर में ही बरकरार रहेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जैसे ही संस्थान को सोलन स्थानांतरित करने संबंधी नोटिफिकेशन रद्द होगी, संघर्ष समिति क्रमिक भूख हड़ताल वापस ले लेगी। वहीं, यदि संस्थान को स्थानांतरित करने का निर्णय वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन के अगले चरण को और उग्र करने की चेतावनी दी गई है।










