कुल्लू के गड़सा में जल निकाय स्वच्छता अभियान के तहत लोगों को किया जागरूक, जल स्रोतों के संरक्षण का लिया संकल्प

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सुरभि न्यूज़ / प्रताप अरनोट, कुल्लू

हिमाचल प्रदेश मत्स्य विभाग की ओर से प्रदेशभर में 20 सितंबर से 20 अक्तूबर 2026 तक चलाए जा रहे राज्यव्यापी जल निकाय स्वच्छता एवं संरक्षण अभियान के तहत जिला कुल्लू के गड़सा में विशेष जागरूकता एवं जनभागीदारी कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से स्थानीय लोगों को जल स्रोतों की स्वच्छता, संरक्षण और प्रदूषण की रोकथाम के प्रति जागरूक किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य संदेश ‘मेरा जल निकाय, मेरी जिम्मेदारी’ तथा ‘स्वच्छ जल निकाय–जलीय जीवन बचाएं’ रहा। कार्यक्रम का आयोजन वरिष्ठ मत्स्य अधिकारी कुल्लू राजिंदर पाल ठाकुर ने विभागीय कर्मचारियों के सहयोग से किया। इसमें पंचायत प्रतिनिधियों, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय गड़सा की प्रधानाचार्या अनीता शर्मा, एनएसएस स्वयंसेवकों तथा स्थानीय लोगों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

अभियान के दौरान प्रतिभागियों ने गड़सा जलधारा के किनारे जमा मलबे, कचरे और अन्य अनावश्यक सामग्री को हटाकर स्वच्छता अभियान चलाया। इस दौरान करीब 45 किलोग्राम कचरा एवं मलबा एकत्र कर हटाया गया।

स्वच्छता गतिविधि के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया गया कि जल स्रोत केवल पेयजल या सिंचाई के साधन नहीं हैं, बल्कि ये जलीय जीव-जंतुओं, जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने आमजन से जल निकायों और उनके आसपास कूड़ा-कचरा न फेंकने तथा प्राकृतिक जल स्रोतों को स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वच्छ एवं स्वस्थ जल निकाय मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ उन समुदायों के जीवन और आजीविका के लिए भी जरूरी हैं, जो प्राकृतिक जल संसाधनों पर निर्भर हैं।

वर्तमान और भावी पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण जरूरी
कार्यक्रम के दौरान ‘जल बचाएं, जल को स्वच्छ रखें’ का संदेश देते हुए वर्तमान और भावी पीढ़ियों के लिए जल निकायों के संरक्षण की सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया गया।प्रतिभागियों ने प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग और प्रकृति के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

वरिष्ठ मत्स्य अधिकारी राजिंदर पाल ठाकुर ने पंचायतों, शैक्षणिक संस्थानों, गैर-सरकारी संगठनों, महिला एवं युवक मंडलों, दिव्यांगजनों तथा आम जनता से अभियान में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय जल स्रोतों की स्वच्छता और संरक्षण को केवल अभियान तक सीमित न रखते हुए इसे निरंतर सामुदायिक जिम्मेदारी बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि यह अभियान निदेशक-सह-मछली पालन विभाग ओम कांत ठाकुर के मार्गदर्शन एवं दिशा-निर्देशों के तहत चलाया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य जन-जागरूकता बढ़ाने, जल निकायों के प्रति सामुदायिक स्वामित्व की भावना विकसित करने तथा जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण एवं सतत प्रबंधन को सुनिश्चित करना है।

मत्स्य विभाग ने सभी वर्गों से आगे आकर ब्यास नदी सहित नदियों, नालों, खड्डों और अन्य जल निकायों को स्वच्छ एवं स्वस्थ रखने में योगदान देने की अपील की है, ताकि वर्तमान के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी स्वच्छ जल और स्वस्थ जलीय पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सके।

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