सुरभि न्यूज़
प्रताप अरनोट, केलांग
लाहौल-स्पीति जिला में आम जनता की समस्याओं के समाधान और जन शिकायतों के निवारण के लिए ‘सरकार गाँव के द्वार’ कार्यक्रम के तहत 13 और 14 अक्टूबर को विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में लोगों की शिकायतें और विकास संबंधी मांगें सुनी जाएंगी। उपायुक्त लाहौल-स्पीति किरण भड़ाना ने बताया कि जनसमस्याओं के प्रभावी निपटारे के लिए जिले की पंचायतों को दो क्लस्टरों में विभाजित किया गया है।
13 अक्टूबर को केलांग में सुनी जाएंगी शिकायतें
पहले क्लस्टर के अंतर्गत 13 अक्टूबर, 2026 को दोपहर 2:30 बजे पुराने परिधि गृह, केलांग में जन शिकायतें और मांगें प्राप्त की जाएंगी।
इस क्लस्टर में कोकसर, सिस्सू, खंगसर, शूलिंग, गोंधला, मूलिंग, गोशाल, तांदी, वारपा, रानिका, शांशा, जोबरंग, गोहरमा, मालंग, कारदंग, बरबोग, दारचा, कोलंग, युरनाथ और केलांग पंचायतों को शामिल किया गया है। इन पंचायतों के निवासी शिविर में अपनी समस्याएं और मांगें संबंधित अधिकारियों के समक्ष रख सकेंगे।
दूसरे क्लस्टर के अंतर्गत 14 अक्टूबर, 2026 को सुबह 11 बजे अम्बेडकर भवन, उदयपुर में जन शिकायतें और मांगें सुनी जाएंगी।
इस क्लस्टर में तिंदी, सलग्रां, मडग्राम, उदयपुर, चिमरेट, तिंगरेट, शकोली, त्रिलोकनाथ, किशोरी, थिरोट, मूरिंग, नालड़ा, जूंडा और जाहलमा पंचायतें शामिल हैं। इन पंचायतों के लोगों को अपनी समस्याएं संबंधित विभागों के समक्ष रखने का अवसर मिलेगा, ताकि उनका नियमानुसार समाधान किया जा सके।
उपायुक्त किरण भड़ाना ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्धारित तिथि, समय और स्थान पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि शिविरों में प्राप्त शिकायतों और मांगों की गंभीरता से जांच की जाए तथा नियमानुसार उनके निवारण के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन शिकायतों का समाधान मौके पर ही संभव है, उनका निपटारा शिविर के दौरान ही सुनिश्चित किया जाएगा। वहीं, जिन मामलों का समाधान मौके पर नहीं हो सकेगा, उन्हें संबंधित विभाग द्वारा दर्ज किया जाएगा और उन पर की जाने वाली कार्रवाई का रिकॉर्ड भी रखा जाएगा।
कार्यक्रम के तहत नियुक्त नोडल अधिकारी विभिन्न विभागों में प्राप्त शिकायतों की प्रगति रिपोर्ट संकलित करेंगे। इसके बाद आगे की आवश्यक कार्रवाई के लिए समेकित रिकॉर्ड उपायुक्त कार्यालय को प्रस्तुत किया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य जन शिकायतों पर की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड बनाए रखना और लंबित मामलों के निवारण की प्रगति पर नजर रखना है। कार्यक्रम के माध्यम से प्रशासन और आम जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित कर लोगों की समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने का प्रयास किया जाएगा।











