सुरभि न्यूज़
खुशी राम ठाकुर, बरोट
हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के विस्तार के चलते बसों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है, जिससे लोगों को आवागमन की सुविधा तो मिली है, लेकिन सुरक्षित और आरामदायक सफर की चुनौती अब भी बनी हुई है। आए दिन हो रहे सड़क हादसों के कारण यात्रियों में सफर के दौरान चिंता बनी रहती है। विशेषकर दुर्गम क्षेत्रों में चलने वाली बसों की सुरक्षा और तकनीकी स्थिति को लेकर लोगों ने चिंता जताई है।
छोटा भंगाल घाटी के समाजसेवी धर्म चंद ठाकुर ने कहा कि सड़क हादसों के पीछे कई बार मानवीय चूक सामने आती है। यह चूक वाहन चलाने के दौरान भी हो सकती है और सड़कों के रखरखाव में लापरवाही के कारण भी। उन्होंने कहा कि ओवरलोडिंग और यातायात नियमों की अवहेलना की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जो यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने मांग उठाई कि सामान्य रूटों के साथ-साथ विशेषकर दुर्गम क्षेत्रों के बस रूटों पर बसें भेजने से पहले संबंधित बस अड्डों और मुख्य स्थानों पर उनकी तकनीकी जांच अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए। बसों के ब्रेक, टायर, इंजन और अन्य जरूरी तकनीकी उपकरणों की स्थिति सुनिश्चित करने के बाद ही उन्हें रूट पर भेजा जाए।
धर्म चंद ठाकुर ने कहा कि कई बार सड़क हादसों के बाद सामने आने वाली जांच रिपोर्टों में बसों में तकनीकी खराबी की बात भी सामने आती है। ऐसे मामलों में विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकारी बसों के मामले में भी नियमित तकनीकी निरीक्षण और रखरखाव व्यवस्था को गंभीरता से लागू किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सड़क हादसों को रोकने के लिए केवल प्रशासन और परिवहन विभाग की जिम्मेदारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि आम लोगों को भी यातायात नियमों के प्रति जागरूक और सतर्क रहना होगा। वाहन चालकों को सावधानीपूर्वक वाहन चलाना चाहिए तथा यात्रियों को भी ओवरलोडिंग और अन्य नियमों की अवहेलना के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
उन्होंने परिवहन विभाग और संबंधित अधिकारियों से मांग की कि दुर्गम क्षेत्रों में चलने वाली बसों की नियमित जांच, चालकों की जिम्मेदारी तय करने और सड़क सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि यात्रियों को सुरक्षित सफर की सुविधा मिल सके।










