जिला कुल्लू में कई दिव्यांगता प्रमाण पत्र संदेह के घेरे में, अस्थायी रूप से रोके गए सरकारी लाभ

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सुरभि न्यूज़

परस राम भारती, कुल्लू (बंजार)

हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू की ग्राम पंचायत नोहांडा और तुंग से जुड़े कई दिव्यांगता प्रमाण पत्रों को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में यह स्पष्ट हुआ है कि अनेक लाभार्थियों के दिव्यांगता प्रमाण पत्र संदिग्ध अथवा अप्रमाणित पाए गए हैं।

इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स एंड क्राइम कंट्रोल काउंसिल हिमाचल प्रदेश के राज्य समन्वयक अमर सिंह ठाकुर द्वारा दायर आरटीआई में इस मामले का खुलासा हुआ है। आवेदन में पंचायत नोहांडा व तुंग के 17 व्यक्तियों के दिव्यांगता प्रमाण पत्रों, मेडिकल बोर्ड, पुनर्मूल्यांकन तथा शिकायतों से संबंधित जानकारी मांगी गई थी।

निजी जानकारी का हवाला, पर आंशिक खुलासा

क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय ने अपने जवाब में दिव्यांगता प्रमाण पत्रों की प्रतियां देने से यह कहते हुए इनकार किया कि यह जानकारी आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(j) के तहत व्यक्तिगत प्रकृति की है। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने यह भी स्वीकार किया कि मामले से संबंधित आंशिक जानकारी उपलब्ध कराई गई है।

2022 में ही संदिग्ध पाए गए थे प्रमाण पत्र

आरटीआई के माध्यम से यह अहम तथ्य सामने आया कि 01 अगस्त 2022 को ही कुछ लाभार्थियों के दिव्यांगता प्रमाण पत्र संदिग्ध/काल्पनिक पाए जा चुके थे। इसके बाद क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू ने उप-मंडल दंडाधिकारी, बंजार को पत्र लिखकर इन मामलों की जांच कराने तथा अंतिम सत्यापन तक सभी सरकारी लाभ रोकने का अनुरोध किया था।

मेडिकल बोर्ड के समक्ष पेश होने के निर्देश

अस्पताल प्रशासन द्वारा संबंधित लाभार्थियों को डाक के माध्यम से नोटिस भेजकर मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे। स्पष्ट किया गया था कि तय समय में पुनः मूल्यांकन न कराने की स्थिति में उनका दिव्यांगता प्रमाण पत्र और UDID कार्ड निरस्त किया जा सकता है।

UDID पोर्टल पर भी नहीं मिले कई रिकॉर्ड

आरटीआई के जवाब में यह भी सामने आया कि केवल कुछ लाभार्थियों के दिव्यांगता प्रमाण पत्र ही अस्पताल रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं, जिनमें अधिकांश में 40 प्रतिशत दिव्यांगता दर्शाई गई है। वहीं कई अन्य लाभार्थियों के प्रमाण पत्र UDID पोर्टल पर भी ट्रेस नहीं हो पाए, क्योंकि उनके UDID नंबर गलत या अपूर्ण पाए गए।

जिला कल्याण अधिकारी को भी दी गई जानकारी

इस पूरे प्रकरण से जिला कल्याण अधिकारी, कुल्लू को भी अवगत करवा दिया गया है ताकि आगे आवश्यक प्रशासनिक और वैधानिक कार्रवाई की जा सके।

नौकरियों और योजनाओं की निष्पक्षता पर सवाल

आरटीआई से सामने आए तथ्यों के आधार पर अब यह मांग तेज हो गई है कि दिव्यांगता के आधार पर नौकरी प्राप्त करने वाले सभी मामलों की निष्पक्ष जाँच करवाई जाए। यदि जाँच में किसी भी स्तर पर फर्जी या गलत प्रमाण पत्र पाए जाते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध सेवा नियमों के तहत कड़ी विभागीय व कानूनी कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है। साथ ही जिन लोगों या बिचौलियों ने ऐसे प्रमाण पत्र बनवाने में भूमिका निभाई है, उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की मांग उठ रही है।

हाईकोर्ट या लोकायुक्त तक जा सकता है मामला

बुद्धिजीवियों और कानूनी जानकारों के अनुसार, जब सरकारी रिकॉर्ड स्वयं प्रमाण पत्रों को संदेहास्पद मानते हों और इसके बावजूद लाभ जारी रहे हों, तो यह लोकधन के दुरुपयोग और कर्तव्य में लापरवाही का मामला बनता है। ऐसे में सुचना का अधिकार अधिनियम के आधार पर अब इस प्रकरण में जनहित याचिका लोकायुक्त शिकायत या विजिलेंस जांच की कार्रवाई की संभावना प्रबल होती दिख रही है।

यह मामला सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता, जवाबदेही और वास्तविक दिव्यांगों के अधिकारों की रक्षा से जुड़ा है। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कितने प्रमाण पत्र वैध हैं और कितने निरस्त किए जाएंगे।

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