यहाँ आपके दिए गए विवरण के आधार पर दो अलग-अलग प्रमुख समाचार तैयार किए गए हैं:
खबर 1: चौहार घाटी में ‘टीला बांड’ (चकबंदी) की मांग तेज, किसानों और बागवानों ने सरकार से उठाई गुहार
मंडी/बरोट (खुशी राम ठाकुर):
जिला की दुर्गम चौहार घाटी के लोगों के लिए खेतीबाड़ी ही जीवन-यापन का एकमात्र जरिया है। ऐसे में घाटी के किसान लंबे समय से ‘टीला बांड’ (लैंड कंसोलिडेशन/चकबंदी) करने की मांग कर रहे हैं। आजकल एक बार फिर से समूची चौहार घाटी के किसानों ने टीला बांड करने की मांग को जोरदार ढंग से उठाना शुरू कर दिया है।
क्या है मुख्य समस्या?
चौहार घाटी में किसानों के खेत एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़े और बिखरे हुए हैं। इस वजह से जहाँ एक तरफ आधुनिक खेती और बागवानी सही ढंग से नहीं हो पा रही है, वहीं दूसरी तरफ लोगों को मकान बनाने और अन्य निर्माण कार्यों में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
फसलों की अपार संभावनाएँ
चौहार घाटी में बड़े पैमाने पर नगदी फसलों की खेती होती है, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- सब्जियाँ व खाद्यान्न: आलू, राजमाह, मटर, लहसुन, मक्की और जौ।
- बागवानी: घाटी में फलदार पौधों और बागवानी की अपार संभावनाएँ हैं, लेकिन चकबंदी न होने से किसान इसका पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।
किसानों का रुख
घाटी के ग्रामीणों—सहदेव, श्यामलाल, रामलाल, श्रीपत, राम सिंह, मेद राम, सतपाल, यश पाल, शेर सिंह, और रामदेव—का कहना है कि चकबंदी न होने के बावजूद यहाँ के मेहनतकश किसान कड़ी मेहनत से अच्छी पैदावार कर लेते हैं। यदि प्रदेश सरकार और राजस्व विभाग यहाँ टीला बांड कर दे, तो सभी किसानों के खेत एक जगह हो जाएँगे। इससे किसान बेहतर तकनीक से खेती कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकेंगे और बेरोजगार युवा भी आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
जिला परिषद सदस्य ने की अपील
बथेरी वार्ड-2 से जिला परिषद सदस्य रोशन लाल ठाकुर ने प्रदेश सरकार और राजस्व विभाग से इस दिशा में तुरंत कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि टीला बांड न होने से लोग मकान निर्माण तक नहीं कर पा रहे हैं। जनहित को देखते हुए चौहार घाटी में लैंड कंसोलिडेशन अति आवश्यक हो गया है।
खबर 2: सावन माह में चौहार और छोटा भंगाल घाटी हुई भक्तिमय, देव जातरों का सिलसिला शुरू
बरोट (खुशी राम ठाकुर):
पवित्र सावन माह की शुरुआत के साथ ही चौहार घाटी और छोटा भंगाल घाटी में धार्मिक अनुष्ठानों व ‘देव कारज’ का दौर शुरू हो गया है। पूरे क्षेत्र में देव जातरों के आयोजनों से माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया है।
चौहार घाटी में देव मिलन और जातर
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- रूंलिंग गांव: लपास पंचायत के रूंलिंग गांव में ‘देव जातर’ का आयोजन अत्यंत धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ किया गया।
- हुर्ंग में काहिका मेला: देव हुरंग के मूल व पवित्र स्थल हुर्ंग में ऐतिहासिक ‘काहिका’ देव मिलन एवं जातर का आयोजन श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ।
- झरवाड़ गांव में 26 जुलाई को आयोजन: खलैहल पंचायत के झरवाड़ गांव में 26 जुलाई को देव पशाकोट, माता फूंगणी, माता लाहूली, माता सतवादनी और देव अजियापाल की पारंपरिक जातर (शमधणग) सजाई जाएगी।
प्राचीन परंपरा: झरवाड़ गांव के दैवघरे के गूर डागी राम तथा पुजारी गोपाल सिंह ने बताया कि सावन माह में प्राचीनकाल से ही यहाँ देव जातर आयोजित करने की परंपरा चली आ रही है, जो पूरे महीने घाटी के विभिन्न दुर्गम गाँवों में जारी रहेगी।
छोटा भंगाल घाटी में 11 गाँवों की परिक्रमा पर निकले देवता
छोटा भंगाल घाटी की लुआई, स्वाड़ और पोलिंग पंचायत में इन दिनों स्थानीय देव नारायण, देव गहरी और माता फूंगणी अपने ग्यारह गाँवों के भ्रमण पर निकले हुए हैं। देव रीतियों के अनुसार सावन महीने में देवताओं की इस परिक्रमा से समूचे क्षेत्र में सुख-समृद्धि की कामना की जा रही है








