सुरभि न्यूज़
मंडी/बरोट (खुशी राम ठाकुर)
जिला की दुर्गम चौहार घाटी के लोगों के लिए खेतीबाड़ी ही जीवन-यापन का एकमात्र जरिया है। ऐसे में घाटी के किसान लंबे समय से ‘टीला बांड’ (लैंड कंसोलिडेशन/चकबंदी) करने की मांग कर रहे हैं। आजकल एक बार फिर से समूची चौहार घाटी के किसानों ने टीला बांड करने की मांग को जोरदार ढंग से उठाना शुरू कर दिया है।
चौहार घाटी में किसानों के खेत एक-दूसरे से पूरी तरह जुड़े और बिखरे हुए हैं। इस वजह से जहाँ एक तरफ आधुनिक खेती और बागवानी सही ढंग से नहीं हो पा रही है, वहीं दूसरी तरफ लोगों को मकान बनाने और अन्य निर्माण कार्यों में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
चौहार घाटी में बड़े पैमाने पर नगदी फसलों की खेती होती है, जिनमें मुख्य रूप से आलू, राजमाह, मटर, लहसुन, मक्की और जौ शामिल है। घाटी में फलदार पौधों और बागवानी की अपार संभावनाएँ हैं, लेकिन चकबंदी न होने से किसान इसका पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।
घाटी के ग्रामीणों में सहदेव, श्यामलाल, रामलाल, श्रीपत, राम सिंह, मेद राम, सतपाल, यश पाल, शेर सिंह, और रामदेव—का कहना है कि चकबंदी न होने के बावजूद यहाँ के मेहनतकश किसान कड़ी मेहनत से अच्छी पैदावार कर लेते हैं। यदि प्रदेश सरकार और राजस्व विभाग यहाँ टीला बांड कर दे, तो सभी किसानों के खेत एक जगह हो जाएँगे। इससे किसान बेहतर तकनीक से खेती कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकेंगे और बेरोजगार युवा भी आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
बथेरी वार्ड-2 से जिला परिषद सदस्य रोशन लाल ठाकुर ने प्रदेश सरकार और राजस्व विभाग से इस दिशा में तुरंत कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि टीला बांड न होने से लोग मकान निर्माण तक नहीं कर पा रहे हैं। जनहित को देखते हुए चौहार घाटी में लैंड कंसोलिडेशन अति आवश्यक हो गया है।











