सुरभि न्यूज़
शिमला, 25 जून
मानसून के दृष्टिगत जिला प्रशासन शिमला ने जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा संभावित प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए व्यापक तैयारियों की समीक्षा बैठक वीरवार को बचत भवन में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त अनुपम कश्यप ने की।
उपायुक्त ने कहा कि सभी एसडीएम मानसून की तैयारियों को लेकर अगले सप्ताह समीक्षा बैठक करेंगे। इसके अलावा सेब सीजन को लेकर भी तैयारियों का जायजा सभी एसडीएम फील्ड स्टाफ के साथ मिलकर लेंगे। उन्होंने कहा कि जिला भर में 200 आपदा मित्र और 500 के करीब युवा आपदा मित्र हैं। उपायुक्त ने कहा कि पंचायत स्तर पर जनप्रतिनिधि आपदा से निपटने के लिए अपनी भूमिका निभाना सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य मानसून के दौरान जनजीवन, संपत्ति एवं महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करना, भारी वर्षा, बाढ़, जलभराव, भूस्खलन तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को कम करना है। प्रशासन द्वारा सभी संबंधित विभागों के बीच पूर्व-मानसून योजना, समन्वय एवं तत्परता को सुदृढ़ किया गया है। इसके साथ संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, उपलब्ध संसाधनों का आकलन, समय पर चेतावनी प्रणाली, प्रभावी राहत एवं बचाव कार्य तथा आवश्यक सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने पर विशेष बल दिया जा रहा है। साथ ही, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय एवं जन-जागरूकता को भी प्राथमिकता दी गई है।
उन्होंने कहा कि शिमला जिला भौगोलिक दृष्टि से हिमालय के संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है, जहां अनियोजित शहरी विस्तार, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव तथा लगातार बदलते वर्षा पैटर्न के कारण भूस्खलन एवं फ्लैश फ्लड जैसी घटनाओं की आशंका बढ़ी है। ऐसे में सतत आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं लचीले विकास की आवश्यकता पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के तहत राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों, पुलों, शहरी एवं ग्रामीण जल निकासी प्रणालियों तथा बाढ़ सुरक्षा संरचनाओं का निरीक्षण किया जा रहा है। संवेदनशील सड़क मार्गों की पहचान कर आवश्यक मरम्मत एवं रखरखाव कार्य समय रहते पूरे किए जा रहे हैं।
इसके अतिरिक्त, भूस्खलन एवं बाढ़ संभावित क्षेत्रों में चेतावनी संकेतक लगाए जा रहे हैं तथा सड़क अवरोध की स्थिति में वैकल्पिक मार्गों की जानकारी आम जनता तक समय पर पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। सभी विभागों को अपने-अपने क्षेत्रों में संवेदनशील स्थानों एवं महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचे की पहचान कर राज्य आपदा शमन निधि के अंतर्गत प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। पंचायत आपातकालीन प्रतिक्रिया योजना के अंतर्गत रोहड़ू, जुब्बल, कुपवी, चौपाल, रामपुर, ननखड़ी एवं चोहारा क्षेत्रों में कुल 219 आपदा प्रतिक्रिया किट वितरित की जा चुकी हैं।
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि जुलाई, अगस्त और सितंबर माह में सभी एसडीएम 10, 20 और 30 तारीख को मानसून की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक करेंगे। इसमें बैठक की प्रोसेसिंग रिपोर्ट अगले दिन भेजना अनिवार्य होगी। उन्होंने कहा कि सभी पटवारी मानसून के दौरान हुए नुकसान की रिपोर्ट वीडियो और फोटोग्राफ युक्त करें। रिपोर्ट में किसी भी प्रकार की कोताही स्वीकार नहीं होगी। उन्होंने कहा कि आपदा पैकेज के तहत दी गई वित्तीय सहायता के आधार पर बन रहे घरों के निर्माण कार्य की फीडबैक ली जाए।
नियमित निगरानी करें विभाग
जिला प्रशासन ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की नियमित निगरानी करें, मौसम संबंधी चेतावनियों का त्वरित प्रसार सुनिश्चित करें तथा बिजली, पेयजल, संचार एवं परिवहन जैसी आवश्यक सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति के लिए आकस्मिक योजनाएं तैयार रखें। पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना एवं अर्धसैनिक बलों के साथ समन्वय बनाए रखने, सुरक्षित राहत शिविरों की पहचान, भारी वर्षा के दौरान संवेदनशील क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही को नियंत्रित करने तथा जल जनित एवं संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
पूर्व आपदाओं के अनुभवों से अग्रिम तैयारियां
जिला प्रशासन ने वर्ष 2023 में समरहिल स्थित शिव बावड़ी मंदिर भूस्खलन तथा वर्ष 2024 में रामपुर उपमंडल के समेज क्षेत्र में बादल फटने एवं फ्लैश फ्लड जैसी घटनाओं से मिले अनुभवों के आधार पर तैयारियों को और मजबूत किया है। इन घटनाओं में जनहानि, सड़क एवं सार्वजनिक सेवाओं का बाधित होना, भवनों, कृषि, बागवानी, जलविद्युत परियोजनाओं तथा परिवहन नेटवर्क को भारी क्षति पहुंची थी।
सूचना तंत्र को मजबूत करने पर जोर
बैठक में प्रभावी पूर्व चेतावनी प्रणाली को मजबूत करने के लिए भारतीय मौसम विभाग (IMD), केंद्रीय जल आयोग (CWC), बांध प्राधिकरणों, उपमंडल अधिकारियों, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) तथा जिला लोक संपर्क कार्यालय (DPRO) के माध्यम से मौसम पूर्वानुमान, वर्षा एवं नदी जलस्तर की निगरानी, सार्वजनिक अलर्ट तथा सोशल मीडिया के जरिए समय पर सूचनाओं का प्रसार सुनिश्चित किया जा रहा है। जिला आपातकालीन संचालन केंद्र (1077) को सक्रिय रखा गया है तथा सभी उपमंडल अधिकारियों को सैटेलाइट संचार प्रणाली (ISAT) की नियमित कार्यशीलता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या कहते आंकड़े
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2016 से 2025 के बीच विभिन्न मौसमों में हुई कुल मौतों में मानसून मौसम के दौरान सर्वाधिक 405 मौतें दर्ज की गईं, जबकि प्री-मानसून अवधि में 390 मौतें दर्ज हुईं, जिनमें सड़क दुर्घटनाएं प्रमुख कारण रहीं।
आमजन से अपील
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करें, अनावश्यक यात्रा से बचें, भूस्खलन एवं बाढ़ संभावित क्षेत्रों से दूर रहें तथा किसी भी आपात स्थिति में जिला आपातकालीन संचालन केंद्र अथवा स्थानीय प्रशासन से तुरंत संपर्क करें। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि समय पर तैयारी, जनसहभागिता एवं विभागीय समन्वय ही मानसून के दौरान संभावित आपदाओं से जन-धन की सुरक्षा का सबसे प्रभावी माध्यम है।
यह रहे मौजूद
बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह, अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी (प्रोटोकॉल) ज्योति राणा, एसडीएम शिमला ग्रामीण मंजीत शर्मा, एसडीएम शहरी ओशीन शर्मा, एसी टू डीसी देवी चंद ठाकुर, एडिशनल एसपी अमित ठाकुर सहित जिला के सभी एसडीएम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े थे।










