कुल्लू जिला के कसोल में रेव पार्टी पर हाईकोर्ट सख्त, एसपी व एसडीएम कुल्लू के किए तबादला के आदेश, उपायुक्त व पुलिस अधीक्षक से मांगा हलफनामा

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सुरभि न्यूज़

शिमला, 25 जून

हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू की मणिकर्ण घाटी के कसोल के जंगलों में धड़ल्ले से चल रही रेव पार्टियों पर आखिरकार हिमाचल हाईकोर्ट का हथौड़ा चल ही गया। पार्टियों पर आंख मूंदकर बैठे पुलिस-प्रशासन को कोर्ट ने सीधे निशाने पर लेते हुए एसपी कुल्लू मदन लाल कौशल और संबंधित एसडीएम प्रशांत ठाकुर का तुरंत तबादला करने के आदेश जारी कर दिए हैं। कोर्ट ने दो-टूक टिप्पणी करते हुए कहा कि “जंगलों में ऐसी पार्टियां कानून व्यवस्था पर विपरीत असर डालती हैं और ये बर्दाश्त नहीं।”

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ ने कसोल में आयोजित हो रही रेव पार्टियों का स्वतः संज्ञान लिया। कोर्ट ने तल्ख लहजे में कहा कि “स्थानीय पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे जंगल में नशे की महफिलें सज रही थीं, लेकिन कार्रवाई जीरो”।

पहले डीएलएसए कुल्लू के सचिव को मौके का निरीक्षण कर 10 दिन में रिपोर्ट देने को कहा गया था। अब सीधे एसपी और एसडीएम को हटाने का आदेश देकर कोर्ट ने साफ कर दिया कि लापरवाही की कीमत अफसरों को चुकानी पड़ेगी। खंडपीठ ने रेव पार्टियों के आयोजकों पर ‘कड़ी से कड़ी कार्रवाई’ करने को कहा है।

पुलिस अधीक्षक मदन लाल कौशल

साथ ही कुल्लू के डीसी और एसपी को निजी हलफनामा दाखिल कर मीडिया में छपी खबरों पर स्पष्टीकरण देने को कहा है। कोर्ट ने दोहराया कि “जंगलों में कोई भी गैरकानूनी पार्टी नहीं होनी चाहिए”। मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को होगी। ये पहली बार नहीं है जब हाईकोर्ट ने नशे और रेव पार्टियों पर सख्ती दिखाई हो। मनाली-मलाणा क्षेत्र में विदेशियों की रेव पार्टियों पर कोर्ट ने डीजीपी से जवाब तलब किया था और कहा था कि हिमाचल को उड़ता पंजाब नहीं बनने देंगे”।

गौरतलब है कि मणिकर्ण घाटी के कसोल-तोश में चल रहे अवैध कैफे और नशे के अड्डों पर कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए रूटीन गश्त और औचक छापे’ के आदेश दिए थे।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाई कोर्ट ने प्रदेशभर में ड्रग माफिया पर नकेल कसने के लिए हर जिले में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स बनाने को कहा था।

कसोल जैसे संवेदनशील इलाके में जंगल में टेंट लगते रहे, डीजे बजते रहे, नशा परोसा जाता रहा और लोकल पुलिस को भनक तक नहीं? या जानबूझकर अनदेखी की गई? कानून व्यवस्था बनाए रखना सीधे एसपी और एसडीएम की जिम्मेदारी है। जब डीएलएसए सचिव को 10 दिन में रिपोर्ट देने भेजा गया, तो क्या स्थानीय अफसर पहले सो रहे थे?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना राजनीतिक-प्रशासनिक शह के जंगल में रेव पार्टियां मुमकिन नहीं। हाई कोर्ट के तबादला आदेश ने इस आशंका पर मुहर लगा दी है।

6 अगस्त को डीसी और एसपी को बताना होगा कि पार्टियां कैसे चल रही थीं और अब तक क्या कार्रवाई हुई। हाई कोर्ट के तेवर देखकर लगता है कि “सिर्फ तबादले से बात नहीं बनेगी, कुछ अफसरों पर गाज गिरना तय है”।

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